कैबिनेट अनुमोदन और बिल का नाम
12 दिसंबर 2025 को केंद्रीय कैबिनेट ने एकल उच्च शिक्षा नियामक बनाने का प्रस्तावित बिल मंज़ूर किया। बिल का नया नाम ‘Viksit Bharat Shiksha Adhikshan Bill’ रखा गया है। इस बिल के माध्यम से मौजूदा तीन Acts — UGC Act (1956), AICTE Act (1987) और NCTE Act (1993) — को निरस्त करने का प्रावधान रखा गया है।
मुख्य प्रावधान
- बिल का उद्देश्य UGC, AICTE और NCTE की जगह एक संयुक्त नियामक काउंसिल स्थापित करना है।
- नए नियामक को संस्थानों को अनुदान/फंड देने का अधिकार नहीं दिया जाएगा; फंडिंग का प्रबंधन शिक्षा मंत्रालय के अधीन रखा जाना प्रस्तावित है।
- उल्लंघन के लिए दंड की सीमा बढ़ाकर लगभग ₹10 लाख से ₹2 करोड़ तक करने का प्रस्ताव बिल में शामिल है।
इन प्रावधानों का प्रभाव नियमन के केंद्रीकरण, वित्तीय अधिकारों और दंडात्मक व्यवस्था पर पड़ने की संभावना से जुड़ा हुआ है।
विपक्ष और आपत्तियाँ
कई सांसदों और शिक्षाविदों ने बिल के खिलाफ विभिन्न आपत्तियाँ उठाई हैं। प्रमुख आपत्तियाँ निम्नलिखित बिंदुओं पर केंद्रित रहीं:
- केंद्रीकरण: एकल नियामक के गठन से नियम बनाने और लागू करने की शक्ति केंद्र में अधिक केंद्रीकृत होने का जोखिम जताया गया।
- संस्थागत स्वायत्तता: विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की स्वायत्तता पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंताएँ व्यक्त की गईं।
- राज्य‑केंद्र सम्बन्ध: शिक्षा के संघीय चरित्र के मद्देनज़र राज्यों की भूमिकाओं व अधिकारों पर असर की आशंका बनी रही।
इन आपत्तियों के मद्देनज़र चर्चा के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की माँग भी उठी है।
UGC के इक्विटी नियम और कानूनी चुनौती
27 जनवरी 2026 को UGC ने परिसर‑स्तरीय जाति‑आधारित भेदभाव रोकने वाले नए ‘इक्विटी’ नियम जारी किये। इन नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। शिक्षा मंत्री ने इन नियमों का बचाव किया और उल्लंघन के मामले में कार्रवाई न होने देने की अनुमति न देने तथा दुरुपयोग रोकने के तर्क दिए।
स्थिति और आगे का रास्ता
बिल के प्रमुख प्रावधानों — तीन पुराने Acts को निरस्त करना, नए नियामक का फंडिंग अधिकार न होना, तथा दंड की सीमा बढ़ाना — से शैक्षिक नियमन में बड़े बदलाव की उम्मीद है। वहीं, केंद्रीयकृत तंत्र, संस्थागत स्वायत्तता और संघीय समीकरणों पर उठी आपत्तियाँ तथा JPC की माँग से स्पष्ट है कि बिल पर व्यापक सार्वजनिक और संसदीय विचार-विमर्श की संभावना बनी हुई है।
UGC द्वारा जारी इक्विटी नियमों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका और शिक्षामंत्री का नियमों का बचाव, इस मामले में न्यायिक और वैधानिक समीक्षा की प्रक्रियाओं की दिशा भी तय करेंगे।
Sources:
- Cabinet clears HECI bill to set up single higher education regulator in India – India Today (12 Dec 2025)
- Council replacing UGC, AICTE, NCTE lacks funding power, gives more teeth to penalties: Viksit Bharat Shiksha Adhishthan Bill 2025 – The Indian Express
- New higher education regulator won’t have funding powers: Pradhan – Business Standard (Dec 2025)
- ‘Won’t allow misuse’: Dharmendra Pradhan defends new UGC rules (27 Jan 2026) – Times of India / Plea challenging UGC’s equity regulations filed in Supreme Court – Economic Times (27 Jan 2026)




