फैसले का सार

संयुक्त राज्य के सर्वोच्च न्यायालय ने 20 फरवरी 2026 को निर्णय दिया कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा 1977 के International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत लगाए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ के अधिकार का उपयोग अतिक्रमित था। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि IEEPA सामान्य आयात-शुल्क लगाने के लिए उपयुक्त नहीं है और ट्रेड नीति में कांग्रेस की प्राथमिक भूमिका बनी रहती है।

न्यायालय ने विशेष रूप से ट्रम्प के सार्वभौमिक 10% ग्लोबल टैरिफ और कुछ देशों पर लागू उच्च "रिसिप्रोकल" दरें (रिपोर्टों में 25–50%) को चुनौती में रखा। यह निर्णय उन व्यापक औपचारिक प्रावधानों पर आधारित रहा जिनके तहत कार्यकारी शाखा ने IEEPA का उपयोग कर व्यापक आयात-शुल्क लागू किए थे।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

फैसले के तुरंत बाद प्रशासन ने वैकल्पिक कानूनी आधार अपन किया। रिपोर्टों के अनुसार, अधिकारियों ने Trade Act के सेक्शन 122 के तहत अस्थायी 10% टैरिफ लागू करने का उपाय चुना, जो 24 फरवरी 2026 से लागू बताया गया। यह कदम IEEPA के बजाय अलग कानूनी प्रावधान के माध्यम से समान शुल्क लगाने का प्रयत्न है।

भारत पर प्रभाव

रिपोर्टों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से भारत के लिए आंशिक राहत मिली है। अनुमान है कि लगभग 55–60% भारतीय निर्यात पर प्रस्तावित उच्च दरें अब लागू नहीं होंगी। हालांकि, कुछ विशिष्ट सामान—जैसे स्टील और एल्यूमिनियम—लगे हुए नियमों के तहत सेक्शन 232 के दायरे में बने रह सकते हैं और उन पर अलग प्रावधान लागू रह सकते हैं।

कानूनी और नीतिगत अनिश्चितता

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कानूनी और नीतिगत अनिश्चितता बरकरार है। प्रशासन इस फैसले को चुनौती दे सकता है और भविष्य में अन्य नियमों या धाराओं के जरिए नई टैरिफ चालें लागू करने की क्षमता रखता है। इसलिए व्यापारिक समुदाय और नीतिनिर्माताओं के लिए अस्थायी राहत के बावजूद अनिश्चितता बनी हुई है।

इस खबर के आधार पर उपलब्ध रिपोर्टें बताती हैं कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला ट्रैड पॉलिसी में कांग्रेस की भूमिका को स्पष्ट करता है जबकि कार्यकारी शाखा वैकल्पिक कानूनी मार्ग अपनाकर नीतिगत लक्ष्यों को हासिल करने का प्रयास जारी रख सकती है।

Sources