नई दिल्ली: आज, 12 जनवरी को, पूरे देश ने 159वीं स्वामी विवेकानंद जयंती मनाई। इस अवसर पर, विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने स्वामी विवेकानंद के अमर विचारों को याद किया और उन्हें देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बताया। विशेष रूप से, उनके प्रसिद्ध वाक्य “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्त होने तक रुको नहीं” ने आज के राजनीतिक विमर्श में विशेष स्थान पाया।
संसद भवन से लेकर दिल्ली के विभिन्न कार्यक्रमों तक, नेताओं ने स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके विचारों को वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्यों से जोड़ा। केंद्रीय मंत्री श्री अर्जुन मुंडा ने एक स्थानीय कार्यक्रम में कहा कि स्वामीजी के विचार हमें सिखाते हैं कि हमें अपने देश के उत्थान के लिए लगातार प्रयास करना चाहिए। उन्होंने युवाओं से स्वामीजी के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का आग्रह किया।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जे.पी. नड्डा ने अपने एक ट्वीट में स्वामी विवेकानंद को ‘राष्ट्र नायक’ बताते हुए कहा कि उनके शिकागो भाषण ने भारत की संस्कृति और आध्यात्मिकता का डंका पूरी दुनिया में बजाया। उन्होंने कहा कि ‘उठो, जागो’ का नारा आज भी देश के युवाओं को आलस्य त्याग कर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करता है।
कांग्रेस पार्टी ने भी स्वामी विवेकानंद को याद किया। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री अनिल भारद्वाज ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि स्वामी विवेकानंद ने हमेशा समावेशिता और राष्ट्रीय एकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में, जब समाज में अनेक प्रकार के मतभेद देखे जाते हैं, तब विवेकानंद के विचार और भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं। उन्होंने विशेष रूप से “लक्ष्य प्राप्त होने तक रुको नहीं” को युवाओं के लिए सबसे बड़ी सीख बताया।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद ने युवा शक्ति को पहचाना और उसे राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार स्वामीजी के सपनों को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने युवा कल्याण योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ये योजनाएं युवाओं को उद्यमी बनने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करती हैं, जो स्वामीजी के “उठो, जागो” के आह्वान का ही एक आधुनिक रूप है।
पश्चिम बंगाल के कोलकाता में, जहां स्वामी विवेकानंद का जन्म हुआ था, वहां भी विभिन्न सांस्कृतिक और राजनीतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने भी स्वामीजी के योगदान को सराहा। राज्य के एक मंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने धर्म, जाति और लिंग के भेद को मिटाकर सबको साथ लेकर चलने का संदेश दिया था।
स्वामी विवेकानंद के विचारों का प्रभाव केवल राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर भी महसूस किया गया। विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों और युवा संगठनों ने भी इस दिन को विशेष रूप से मनाया। कई स्थानों पर मैराथन दौड़, सेमिनार और विचार-विमर्श के आयोजन हुए, जिनमें “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्त होने तक रुको नहीं” विषय पर युवाओं ने अपने विचार रखे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्वामी विवेकानंद के विचार, विशेषकर उनके प्रेरणादायक नारे, आज के राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ में भी उतने ही प्रासंगिक हैं। यह नारे न केवल युवाओं को प्रेरित करते हैं, बल्कि नेताओं को भी अपने दायित्वों के प्रति सचेत करते हैं। यह जयंती एक बार फिर इस बात का प्रमाण है कि स्वामी विवेकानंद के विचार सदियों तक देशवासियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।


